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शनिवार, 11 जुलाई 2009

यूलिप फीस को लेकर इरडा सख्त


यूनिट लिंक्ड बीमा पालिसियों [यूलिप] की प्रीमियम राशि आने वाले दिनों में कम हो सकती है। बीमा क्षेत्र की नियामक एजेंसी इरडा ने यूलिप को लेकर ग्राहकों से भारी-भरकम फीस वसूलने वाली बीमा कंपनियों पर नकेल कसने की अपनी मंशा जता दी है। इसके लिए बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण [इरडा] यूलिप फीस की एक सीमा निर्धारित करने पर विचार कर रहा है। बीमा कंपनियां यूलिप पालिसियों पर इस सीमा से ज्यादा फीस वसूल नहीं कर सकेंगी।

इस बारे में बीमा कंपनियों के साथ विचार-विमर्श कर इरडा विस्तार से दिशानिर्देश लागू करेगा। इस बात का खुलासा इरडा के अध्यक्ष जे हरि नारायण ने यहां किया। वे फिक्की द्वारा स्वास्थ्य बीमा पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करने के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे।

इरडा का कहना है कि बीमा कंपनियों पर यूलिप शुल्क की सीमा निर्धारित करने को लेकर कई विकल्पों पर विचार हो रहा है। एक सुझाव यह है कि कुल प्रीमियम राशि की अधिकतम 25 फीसदी की सीमा तय कर दी जाए। इसमें यह भी होगा कि यूलिप के तहत ग्राहकों से किस-किस प्रकार के शुल्क लिए जा सकते हैं। इस समय कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं होने के चलते बीमा कंपनियां तरह-तरह की मनमानी करती हैं। बहरहाल, आगे फैसला करने के लिए इरडा की तरफ से एक आंतरिक समिति का गठन किया गया है। हरि नारायण के मुताबिक ग्राहकों के हित के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा।

हरि नारायण ने बताया कि इरडा इस समय बीमा क्षेत्र के विकास को लेकर कई नए नियम तैयार कर रही है। इसमें बीमा कंपनियों के लिए पूंजी बाजार में प्रवेश करने संबंधी नियम भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बीमा कंपनियों के लिए पूंजी बाजार में प्रवेश करने संबंधी नियमों को अगले कुछ महीनों के भीतर तैयार कर लिया जाएगा। इसी तरह से बीमा क्षेत्र में अधिग्रहण व विलय को लेकर भी नियम बनाए जा रहे हैं। उक्त विषयों पर अभी तक देश में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं।

भारतीय बीमा क्षेत्र को वर्ष 2000 में खोला गया था। अभी जीवन बीमा क्षेत्र में 22 और गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में 21 कंपनियां कार्यरत हैं। माना जा रहा है कि भारतीय बीमा क्षेत्र में अब कंपनियों के बीच विलय का माहौल बनने लगा है। यही कारण है कि इरडा नियम बनाने में जुटी हुई है।

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